Thursday, July 30, 2015

भारतीय ....

आज सुबह से ही मन बहुत विचलित है ....कभी बहुत प्रसन्न और कभी अत्यंत पीड़ा हो रही है |

एक ओर डॉक्टर कलाम के निधन से मन दुखी है तो दूसरी ओर उनकी आत्मीयता, खुले विचारों से भरपूर व्यक्तित्व और उपलब्धियों के बारे में पढ़ कर अपने इस गौरवशाली पूर्व राष्ट्रपति
को अंतिम बार देखने आई भीड़ को देख भारत की एकता पर गर्व होता है |

आत्मीयता और प्रेम कोई बंधन,भेद नहीं देखते .......ये एक ऐसा तथ्य है जो हर हृदय स्वीकारता है .....कोई तर्क-वितर्क नहीं रह जाता |

मन दुखी एक और विचार से हो रहा है ......याकूब की फांसी पर जो नाटक टीवी पर चल रहा है.
यह जान कर बहुत संतुष्टि हुई की मैं उस देश से हूँ जहां ऐसा व्यक्ति जो स्वयं कई लोगों की मृत्यु के लिए उत्तरदायी और बंदी है उसे भी समान रूप से अपनी बात रखने और लड़ाई लड़ने का अधिकार है |

पर इस विषय पर जो समाचारों का सिलसिला चल रहा है उससे बहुत पीड़ा हुई है |

मेरा मन भी यही कहता है की फांसी किसी को भी न हो, हर व्यक्ति में सुधार और बदलाव की उम्मीद होती है ऐसा मेरा मानना है , इसे किसी समर्थन की आवश्यकता से ज्यादा आत्मीयता से देखने आवश्यकता है...पर यह नहीं समझ पायी की एक जागरूक देशवासी होने के नाते हमें यह बात धर्म के सहारे लपेट कर क्यों कहनी पड़ गयी ...और वो भी तब ही क्यों याद आती है जब किसी को ये सज़ा सुना दी गयी हो |

कानून में बदलाव लाना अगर आवश्यक है तो हम इस बात को अलग तरह से प्रस्तुत क्यों नहीं करते .....सिर्फ एक भारतीय हो कर इस बात को कहना भी बदलाव लाने के लिए बहुत होगा | अगर आप देश की क़ानून व्यवस्था पर भरोसा रखते हैं तो यह लड़ाई भी उसी भरोसे से लड़िये ...इसे लोगों में अलगाव बढाने के लिए इस्तेमाल करना निंदनीय है |

हमारे देश का संविधान हमे इसका पूरा अधिकार देता है | 

यह लिख कर किसी का समर्थन करने का मेरा ध्येय नहीं है ...परन्तु एक फांसी की सज़ा को हम कितना मनोरंजक बना सकते हैं यह देख कर मन बहुत दुखी है |
-- तनु 

4 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन कलाम-ए-हिन्द और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  2. sadha hua lekhan Tanu... Keep writing

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    1. Dhanyavaad Sonal Ji , it is from heart not from mind....truth lies much beyond intellectual gymnastics, only shift in glance can help ....we can't see close from telescope

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  3. दुःख तो वाकई होता है, तिल का ताड़ बनाती मीडिया से। हर बात को जात धर्म से जोड़ते अवसरवादियों से। अभी बिहार चुनाव में देखिये क्या क्या नौटंकी होती है।

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