Tuesday, March 6, 2012

अथ श्री “कार” माहत्म्य पार्ट-२


कार की महानता अपरम्पार है, मैंने बताया भी था पहले…आशीष भाई दिल पे ले गए इस बात को| आव देखा ना ताव ला के एक सफ़ेद चमचमाती कार खड़ी कर दी कि “लो बेट्टा, बहुत बोल रहे थे, देखो ला दिए कार, अब बोलो" | हमने माहौल संभाला और बोला “अरे भाई बधाई हो, बहुत बहुत बधाई हो” |

लेकिन वो इतने से नहीं माने और बोले कि “अबे मेरे पास तो कार भी है और उसको चलाने का लाइसेंस भी, तुम्हारे पास क्या है ???” अब क्या जवाब देते हम | “शांत गदाधारी भीम शांत" ये मन ही मन सोच के खुद को शांत किया और बड़े प्यार से लजाते हुए बोले

“यार कार तो मेरे पास भी है,शेयरिंग में है तो क्या हुआ"|

“हाँ तो, का करोगे ऐसी कार का जब चलाना ना आये| और सुनो तब तक अपना मुंह मत दिखाना जब तक हाथ में लाइसेंस ना हो, पता नहीं कहाँ कहाँ से चले आते हैं लोग" ये बोलकर वो चले गए|

मार्केट में अपनी  इतनी बेज्जती कभी नहीं हुई थी | थोड़ी बहुत हुई थी, दैट आई मैनेज्ड | पूरे १५ मिनट इस समस्या पे विचार किया | फिर मोटी चमड़ी ओढ़ के सो गए |

२ घंटे बाद आशीष बाबू का ही फोन आया और बोले:

“घूमने चलोगे”

“कहाँ" हमने सवाल किया |

“जहाँ हम चाहेंगे वहाँ, जिनको कार चलाना नहीं आता वो चुपचाप पीछे बैठे, बेगर्स कांट बी चूज़र्स” हड़काते हुए बोले |

फिर बेज्जती | पिछली बार से ज्यादा | अब ठान लिया कि कुछ भी हो जाये कार “हांकना" सीखना ही है | और लाइसेंस भी लेना है काहे कि जब तक डिग्री ना हो तब तक बिक्री नहीं होती मार्केट में ना  |

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यहाँ लाइसेंस लेने के लिए पहले एक ठो लिखित परीक्षा पास करनी पड़ती है | वो हम पहले ही पास कर चुके थे | फिर किसी ड्राइविंग स्कूल से कम से कम ६ घंटे का कोर्स करना पड़ता है और उसके बाद लाइसेंस के लिए आप जो है योग्य हो जाते हो| हम भी पहुंचे एक स्कूल में, पहले ही दिन इंस्ट्रक्टर ने बताया :

“देखो, आगे वाली कार से ३ सेकण्ड की दूरी पे रहो, कोई खम्बा या साइन बोर्ड जब वो पार करे तो गिनो १००१, १००२, १००३, १००४ और तब तुम्हारी कार निकलनी चाहिए उस खम्बे या बोर्ड के पास से| अगर इससे कम हो तो स्पीड कम कर लो”

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मन में आया बोल दूं कि इससे कम होगी तो स्पीड बढ़ा ना लूं, उससे आगे निकल जाऊंगा फिर वो गिनेगा १००१, १००२, १००३ , १००४ | पर बोलने में डर लगा |

इसके बाद एक नयी बात बताई इंस्ट्रक्टर ने
“अगर कार चलाते टाइम कभी नींद आने लगे तो कार की स्पीड कम करो, किसी रेस्ट एरिया में जाओ और थोड़ा सो लो, फिर आगे बढ़ो"
मन में आया क्यूँ ना स्पीड बढ़ा लूं और जल्दी घर पहुँच जाऊं और फिर सो जाऊं आराम से | लेकिन मैंने अपने विचारों को एक बार और  काबू किया |

३ दिन में ६ घंटे की क्लासेस करके और क्लास पूरी तरह से करने का प्रमाण पत्र लेकर हम पहुंचे लाइसेंस लेने | सबने बताया कि एक बार क्लासेस कर लो तो ज्यादातर लाइसेंस बिना टेस्ट दिए मिल जाता है | पर लाइसेंस देने के लिए जो कन्या बैठी हुई थी उसे मेरी भोली सूरत पे तरस आ गया और टेस्ट देने का फरमान जारी कर दिया | जोश में हम भी टेस्ट के लिए रेडी हो गए | पूरे एक घंटे बाद नंबर आया मेरा | और १५ मिनट टेस्ट लेने के बाद परीक्षक ने लाइसेंस देने से मना कर दिया | बोले कि “तुम कार घुमा नहीं पाते ठीक से, कुछ ज्यादा ही वेट करते हो चौराहे पे और सबसे बड़ी बात पूरे रस्ते ओवर स्पीडिंग करते रहे तुम, जाओ फिर से प्रैक्टिस करो” |

मुझे रिजेक्ट होने का उतना दुःख नहीं था जितना मुझे आशीष कि हंसी से लग रहा था जो वो पेट पकड़ पकड़ के हंसने जा रहा था | खैर रोनी सी सूरत बना के पहुंचे हम|

“अरे बड़ा बुरा हुआ यार ये तो , मैंने तो टेस्ट भी नहीं दिया था फिर भी मिल गया था , वैसे सीरत की बात होती है देखो ये तो , मैंने दिया भी होता तो क्लियर हो जाता, कोई नहीं, थोड़ी और मेहनत करो, बेटर लक नेक्स्ट टाइम” अंदाज़ तो उनका हौसला बढ़ाने वाला था पर असलियत तो मैं जानता हूँ|

पूरे १ घंटे और तैयारी की | दुबारा टेस्ट दिया | इस बार परीक्षक का कमेन्ट था “तुमने पूरे रस्ते गाड़ी ५ मील प्रति घंटा धीरे चलायी”| मन किया कि बोलूँ “रुक अभी तेरे को गाड़ी के पीछे बांधता हूँ, फिर दौड़ा दूंगा कार तब बताना कि तेज चल रही है या धीमे,  कभी बोलते हो तेज चलायी, कभी बोलते हो धीमे चलायी, एक बात पे रहो, थाली पर के बैगन कहीं के”

पर ये सब कहना नहीं पड़ा क्यूंकि उसने इस हिदायत के साथ की मैं अपनी स्पीड बरोबर रखूंगा लाइसेंस दे दिया|  भागता हुआ मैं आशीष बाबू के पास पहुंचा|

“पता था मुझे तुम ये कर सकते हो" ये कहकर उन्होंने सारा क्रेडिट खुद रख लिया| खैर अच्छा दोस्त है हमने भी माफ कर दिया |


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फिर मैंने थोड़ी रिसर्च की कि कितना पैसा फूँक डाला इस लाइसेंस के चक्कर में | हिसाब लगाया तो पता चला कि अपने हिंदुस्तान के १५००० रुपये लगभग लगा दिए |  बड़ा दुःख हुआ | बाद में पता चला कि कंपनी ये पैसे वापस कर देगी अगर क्लेम करो तो | हमने क्लेम किया |  करीबन ५००० रुपये टैक्स कट गया क्लेम के लफड़े में | खुशी हुई कि केवल ५००० गए बाकी तो बचे  | पार्टी देने का मन कर गया |

थोड़ा और सोचा कि अगर मैंने १००० रुपये सुविधा शुल्क के दिए होते तो घर बैठे लाइसेंस मिल जाता अपने मुल्क में | खर्चा भी कम , आराम भी ज्यादा | तभी मैं स्ट्रोंग लोकपाल बिल के अगेंस्ट हूँ|

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खैर ये सब बात निपटी, लफड़ा लोचा निपटा | लाइसेंस भी आ गया | कार भी हांकने लगे | आशीष भाई का भी शुक्रिया किया हमने कि उन्होंने हमें ये सब करने के लिए प्रेरित किया | वो वाकई में बड़े खुश हुए| 

हमारे एक और दोस्त हैं, उनको लेकर हम लोग घूमने निकले, "कार" से | पूरे दिन घूमने के बाद उन्होंने हमारी ड्राइविंग स्किल पे अपना फीडबैक दे मारा:

“यार तुम चलाते तो बढ़िया हो पर अभी वो बात नहीं आयी, टर्निंग पे स्पीड ज्यादा होती है, ब्रेक प्रोपर नहीं लगाते, साथ बैठने में अभी थोड़ा डर लगता है, थोड़ी और मेहनत करो"

आशीष भाई को इसका तोड़ पता था तुरंत उनसे बोले “अरे तुम्हारा लाइसेंस आ गया??"

बुरी तरह झेंपते हुए उन्होंने बोला “कहाँ यार, जाना है, ड्राइविंग में कॉन्फिडेंस नहीं आ रहा अभी"

इसके बाद मैं चाह के भी नहीं हंस पाया|
--देवांशु

13 comments:

  1. १.ये तो मानेंगे कि खुद के फेल होने से ज्यादा दुःख दोस्तों के पास होने पर होता है!
    २."फ़ीडबैक" वाले दोस्त सिर्फ़ देना जानते है, लेते नही है!

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    1. दोनों प्वाइंट, एक दम टू द प्वाइंट... :)

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  2. ha ha ha ..mai ab kya kahu mai to khud be'kar' hu,


    kamal hai yar

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  3. pura post pad kr mujhe bahut hasi aayi,waise ye baat sahi hai ki dost feedback dete hai lete nhi

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    1. हाँ जब देखो तब फीडबैक :)

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  4. हमें कार चलाते हुए २ साल होने को आये...कुणाल अभी भी मेरे साथ कभी नहीं बैठता साथ में...इन फैक्ट मेरी कार ड्राइविंग का कभी फीडबैक ही नहीं मिला उससे. इस बार जब चाइना से वापस आया तो उसको पिक करने एयरपोर्ट गए थे...हमको मालूम नहीं कि हम कार कैसा चला रहे थे...मगर भाई ने आगे की सीट पर बैठने से इनकार कर दिया...साकिब आगे बैठा और भाई ने पीछे की सीट पर भी सीट बेल्ट बंधे रखी.

    इससे आगे और क्या कहें...वैसे हमको लगता है कि हम कार बहुत अच्छी चलाते हैं :)

    पोस्ट एकदम कड़क है...देवांशु मार्का एकदम :) :)

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    1. हमको भी लगता है हम कार बड़ी "मारू" टाइप चलाते हैं :-)

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  5. :) जलवेदार पोस्ट!

    अपन को तो कार हांकते दो दशक हो गये। एक बार भिड़ाने का भी अनुभव है। लेकिन घर में कोई मानता नहीं कि हम कार चला पाते हैं। घर वाले कहते हैं कार का मतलब बैलगाड़ी थोड़ी न होता है। :)

    दोस्त ने जब पूछा -“अबे मेरे पास तो कार भी है और उसको चलाने का लाइसेंस भी, तुम्हारे पास क्या है ???”
    तो कहना था- अपन के पास कान्फ़ीडेन्स है। :) :)

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    1. आपको तो कार से जुड़े बारीक से बारीक अनुभव हैं :)

      अगली बार मौका पड़ने पे यही जवाब दे देंगे :)

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  6. सही है गुरु. कंट्री क्रोस करो एक बार चलाते हुए :)

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