बुधवार, 22 जुलाई 2015
कुत्ता ढाल और मुन्ह्नोचवा आई गवा !!!
मंगलवार, 26 मई 2015
In Continuation....November 2014 – Winters Again!!!
December 2014 – Winters Continued!!!
We talked again this time, with no apprehension of what happened in past one year with each other, he clearly asked it has no significance as you are speaking with me on this again and if you are “in yes” with me now we shall move ahead.
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| OK we are getting married! |
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| after court marriage |
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| Delhi room, tea break while serious wedding discussion |
| dating time while shopping |
| tired of shopping |
| no more clicking please!...be serious it's shopping time :) |
बुधवार, 20 मई 2015
First meeting, Nov 2013
We met at coffee cum ice cream cafe on ground floor. I could sense little bit of nervousness in him (though don't blame him for this I used to go bit unreachable for first meetings sometimes)when we entered the cafe until we sat down and ordered coffee ....the conversation which is usual for people meeting for arrange marriages started than ....what do you like? What do you don't like? Your expectations? What not!
बुधवार, 1 अप्रैल 2015
अब का लिखें ??
सोमवार, 28 अप्रैल 2014
मौजकाल का भौकाल !!!
ये भारतीय राजनीति का "मौजकाल" है | हर कोई एक दूसरे से मौज ले रहा है |
एक साहब हैं, कहते हैं ५६ इंच का सीना चाहिए देश चलाने के लिए | राजू श्रीवास्तव ज्यादा याद आते हैं , उनके मुताबिक "टाइटेनिक" के हीरो कोई हीरो नहीं हैं काहे की हीरो जो होता तो चौड़े सीने पे बाम्बू रख के टाइटेनिक को बचा लेता | तो चौड़े सीने वाले हीरो हैं | मगरमच्छ को पकड़ के क्लास में ले जा चुके हैं | शूरवीर हैं | फिलहाल तो अच्छे दिन आने वाले हैं देखते हैं क्या होता है | ये बाकी लोगों से बहुत मौज ले रहे हैं आजकल |
दूसरे जनाब हैं "कांट डांस" वाले | ये ज़माने भर को मौज दे रहे हैं | किसी ने कहा की युवाओं का ज़माना है | ये दिल से लगा गए | अपनी उमर से कम उमर की बात करने लगे | बस गाड़ी थोड़ी ज्यादा पीछे ले गए | टॉफी, गुब्बारे की बात करने लगे | गिनती भूल गए | "भिन्न" और "अनुपात" भूल गए | गणित गड़बड़ है इनकी | जब मुंह खोलते हैं , मौज दे बैठते हैं | जनता भी लगता है चाहती हैं की ये मुंह खोलते रहें | इनको जिस बात पर लग रहा होता है की ये मौज ले रहे हैं दूसरे से, मिनट भर बाद पता चलता है की इनसे ही ज्यादा मौज ले ली गयी | मुझे लगता है इनका भाषण लिखने वाला इनसे सबसे ज्यादा मौज ले रहा है |
तीसरे हैं "सीरियस जोक" महानुभाव | इनके हिसाब से हर वो इंसान भ्रष्ट और बिका हुआ है जो इनके खिलाफ बोलता है ( भले ही उस इंसान की आदत हर किसी के खिलाफ बोलने की हो) | इसलिए इनसे मौज लेने वाला फंस जाता है | सबसे बड़ी मौज इनकी ये है की ये सबको कैरेक्टर सर्टिफिकेट देते रहते हैं | जों इनके साथ है वो अगर गालियाँ भी दे तो ये महाशय ये कहके निकल लेते हैं की भड़ास निकाल रहा था बस गलत शब्द बोल गया , अब भड़ास निकालना भी गलत है क्या | ये बिना जनता से पूछे कुच्छो नहीं करते | ईमानदार हैं | पर उससे बड़े स्टंट मैन हैं | इनसे जितनी मौज ली जा सकती है उससे कम ली जा रही है |
और भी बहुत सारे हैं | एक हैं जो खुद बोलने में इतनी गलतियाँ करते हैं पर कहते हैं "युवाओं" से गलतियाँ हो जाती हैं | इनको भी किसी ने समझा दिया है युवाओं का ज़माना है , उनके फेवर में बोलो | इनकी हर काम में टांग अड़ा देने की आदत है और यू टर्न तो ये संकरी गली में भी ले लेते हैं | इन्होने राष्ट्रपति चुनाव में बहुत मौज दी | पहले बोले की एक को समर्थन करेंगे , फिर दूसरे को कर दिया | जब वोट देने की बात आयी तो पहले, पहले को वोट दिया फिर काट के दूसरे को वोट दिया | वैसे इनको वोट देकर आप बाकी किसी और से नहीं खुद से ही मौज ले सकते हैं |
एक मोहतरमा भी हैं | उनके हिसाब से सारी समस्याओं का हल है की राष्ट्रपति शासन लगा दो अगर वो मुख्यमंत्री ना हों तो |
और भी बहुत हैं , कहाँ तक बताएं | जाने दीजिये ना |
हमें पता है ये सब कचरा पढ़ने के बाद आप हमसे बहुत मौज लेने वाले हैं | लीजिये , सब मौज ले रहे हैं , आप भी लीजिए | अब मौज लेने पर कोई टैक्स थोड़े ना लगता है |
है की नहीं ???
-- देवांशु
( पहली लाइन अनूप जी की एक पोस्ट से प्रेरित बोले तो चुराई हुई )
रविवार, 13 अप्रैल 2014
बधाई हो गुलज़ार साहब !!!
हमेशा इंसान ही सम्मानित नहीं होते पुरस्कार पाकर, कुछ पुरस्कार इस बात से भी सम्मानित हो जाते हैं की वो किसे दिए जा रहे हैं |
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